अनिष्ट अथवा किसी असफलता इत्यादि के लिए पुस्तक के लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे l
जोश और उत्साह भर देता है I धनकुबेर की बात करते समय दिमाग में हमेशा यह बात रहती है कि इसे हासिल करनेवाले ने अपने हिसाब से जीवन को ऐसे ढर्रे पर ढाला
वास्तव में जितने भी आध्यात्मिक और धार्मिक भाव है वे सब सर्वप्रथम परावाणी के रूप में आविभूर्त होते है I आवश्यकतानुसार वे भाव पश्यन्ति वाणी में सूक्ष्मतम से सूक्ष्मतम तरंगो में परिवर्तित होते है I फिर वे ही तरंगे सात स्वरों के रूप में प्रकट होती हैमध्यमा वाणी में I उन सात स्वरों का संबंध सप्तऋषि मंडल से बतलाया गया है I मध्यमा वाणी में परिवर्तित होकर आने वाले सातो स्वर विभिन्न प्रकार के विचारो के रूप में परिवर्तित होते है और वे ही विचार बैखरी वाणी के रूप में हो जाते है परिवर्तित I बैखरी वाणी के रूप में बाहर निकलने वाले शब्दाक्षर बिना स्वर का आश्रय लिए प्रकट नहीं हो सकते I इसलिए स्वर प्रधान है I
साधकों को विशेषत: सावधान रहना चाहिए क्योंकि उनके द्वारा दिए गए दोष पूर्ण ज्ञान से साधकका जो अहित होता है उसका कोई निवारण नहीं है। साधना के समय इस अतिरिक्त शक्ति क़ो सहन करने की मनुष्य में क्षमता नहीं होन
* The segmentation of the Eternal Time and the cycles of Creation and Dissolution
Understanding Astrology [English] 9788170821700 अनिष्ट अथवा किसी असफलता इत्यादिAstrology is the Science that investigates the action and reaction existing between the Heavenly bodies and the rest of manifested Nature, including Man Astrology reveals the Laws under which this takes place. It teaches One Law, One Life, in varying forms that are the manifestation of the One Universal Spirit. It enables Man to know himself, to grapple with his nature. It enables him to make the most of his abilities. It further affords him a clue to